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राम मंदिर कहें या बाबरी मस्जिद...पर ये जमीन सियासी रोटी सेंकने के लिए काफी है। लोगों की अास्था और विश्वास की बात को तो कोई देखता ही नहीं, किसी को अपनी सत्ता बचाने और किसी को सत्ता में अाने की होड़ है। जो लोग सत्ता में नहीं थे वह राम के नाम से सत्ता में अाए और जो उससे पहले सत्ता में रहे उन्होंने भी राम नाम पर बस वोट इकट्ठा किए। वो कहते है न कि जीव अात्मा का राम के नाम से बेड़ा पार हो जाता है, शायद बिल्कुल वैसे ही राम के नाम की राजनीति कर वोट बटोर कर पार्टिया अपना अपना बेड़ा पार लगाना चाहती हैं।


चले बात करते हैं राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट में अाज की सुनवाई की। अाज ये सुनवाई हुई की इस मामले को 2019 तक के लिए टाल दिया गया है। जरा रुकिए 2019? 2019 में तो लोकसभा चुनाव भी हैं। मोदी जी के 5 साल 2019 में ही तो पूरे होने वाले हैं। फिर राम मंदिर बनाने के वायदे का क्या हुअा?

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Web Title: Read on the politics related to the history of Ram, this special report

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