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नई दिल्ली: भारतीय वैज्ञानिकों ने मात्र एक साल की मेहनत से ‘हरित पटाखे’ तैयार कर लिए हैं जो कम प्रदूषण फैलाने के साथ किफायती भी हैं, हालांकि इनके बाजार में आने में अभी समय लग सकता है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डा. हर्षवर्धन ने सोमवार को बताया कि वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद् सी.एस.आई.आर. की 3 प्रयोगशालाओं ने मिलकर ये पटाखे तैयार किए हैं। इनका परीक्षण हो चुका है तथा पाया गया है कि इनका सूक्ष्म कणों (पार्टीक्यूलेट मैटर) का उत्सर्जन 30 से 40 प्रतिशत तथा सल्फर डाईऑक्साइड का उत्सर्जन 50 से 60 प्रतिशत कम है। ये पारंपरिक पटाखों की तुलना में 15 से 30 प्रतिशत तक किफायती भी हैं। इसके अलावा पटाखों की ई-लड़ियां भी तैयार की गई हैं जो बैट्री से जलेंगी। 

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ये पटाखे राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी), केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी) और केंद्रीय इलैक्ट्रो रसायन अनुसंधान संस्थान (सिक्री) ने मिलकर तैयार किए हैं। नीरी की वैज्ञानिक डा. साधना रायलू ने बताया कि पारंपरिक पटाखों में एल्यूमीनियम, बेरियम, पोटैशियम नाइट्रेट और कार्बन का इस्तेमाल होता है। ये काफी प्रदूषक हैं। नई रासायनिक संरचना में एल्यूमीनियम की जगह मैग्नीशियम और बेरियम की जगह जिओलाइट का इस्तेमाल किया गया है।

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पोटैशियम नाइट्रेट का इस्तेमाल शून्य या काफी कम कर दिया गया है जबकि कार्बन का इस्तेमाल भी घटा दिया गया है। इसके अलावा रसायनों को जलाकर ऊष्मा पैदा करने की बजाय नई संरचना में पानी के साथ अभिक्रिया करने वाले रसायनों का इस्तेमाल किया गया है। इस अभिक्रिया से उत्पन्न ऊष्मा पटाखों में इस्तेमाल की गई है। डा. हर्षवर्धन ने बताया कि इसके अलावा सीएसआईआर की कुछ अन्य प्रयोगशालाएं भविष्य में पटाखों से प्रदूषण और कम करने की तकनीक पर काम कर रही हैं। इनमें पटाखों में इस्तेमाल होने वाले पदार्थों के संवर्धन तथा उनके लिए मानक तय करना भी शामिल है। 

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पटाखों को स्वास, सफल व स्टार नाम दिया 
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने बताया कि इन पटाखों को स्वास, सफल और स्टार नाम दिया गया है। इनमें धुआं और शोर भी कम होता है। उन्होंने बताया कि पटाखा उद्योग करीब 6,000 करोड़ रुपए का है और इसमें 5 लाख लोगों को रोजगार प्राप्त है। अनुसंधान के दौरान तमिलनाडु के शिवकाशी के पटाखा निर्माताओं को शामिल करके नए पटाखे इस प्रकार विकसित किए गए हैं कि उद्योगों को अपने संयंत्र या निर्माण प्रक्रिया में किसी प्रकार की बदलाव की जरुरत नहीं होगी। इससे न तो उद्योगों को संयंत्र पर कोई अतिरिक्त खर्च करना होगा और न ही किसी का रोजगार जाएगा। 

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उद्योगों को लेना होगा लाइसैंस 
डा. हर्षवर्धन ने बताया कि पटाखों के विनिर्माण के लिए लाइसैंस जारी करने वाले पैट्रोलियम एंड एक्सक्लूजिव सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पेसो) और उच्चतम न्यायालय को इस संरचना तथा परीक्षण के नतीजों के बारे में जानकारी दे दी गई है। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं ने ‘हरित पटाखे’ विकसित कर लिए हैं तथा अब उद्योगों को इनके विनिर्माण के लिए सामने आना होगा और लाइसैंस लेना होगा। 

Web Title: This 'green firecrackers' will be sold in this Diwali as well as affordable with less pollution

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